लोनी में 3 लाख संपत्तियों का डिजिटल सर्वे, ड्रोन से होगी मैपिंग; हर प्रॉपर्टी को मिलेगा UID नंबर


गाजियाबाद के लोनी नगर पालिका क्षेत्र में संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। नगर क्षेत्र की करीब 3 लाख इमारतों, दुकानों और खाली जमीनों का ड्रोन कैमरों और आधुनिक GIS-GPS तकनीक की मदद से डिजिटल सर्वे कराया जाएगा।
इस सर्वे के बाद लोनी की संपत्तियों को यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर यानी UID दिए जाने की योजना है। इसका उद्देश्य संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के साथ-साथ नगर क्षेत्र में नागरिक सुविधाओं, प्रॉपर्टी टैक्स और जमीन के इस्तेमाल की बेहतर निगरानी करना है।
लोनी में क्यों कराया जा रहा है डिजिटल सर्वे?
लोनी नगर पालिका क्षेत्र में कई कॉलोनियां अनियोजित तरीके से विकसित हुई हैं। ऐसे क्षेत्रों में सड़क, सीवर, पानी और जलनिकासी जैसी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं सामने आती रही हैं।
नगर पालिका के अनुसार, डिजिटल सर्वे के जरिए पूरे क्षेत्र का विस्तृत डेटा तैयार किया जाएगा। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किन इलाकों में कौन-कौन सी संपत्तियां हैं और किन क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की जरूरत है।
ड्रोन कैमरों से कैसे होगी संपत्तियों की मैपिंग?
सर्वे में ड्रोन कैमरों के साथ GIS और GPS तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके जरिए इमारतों, दुकानों, खाली जमीन और अन्य संपत्तियों की लोकेशन को डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा।
इस प्रक्रिया से लोनी नगर पालिका का डिजिटल मैप तैयार करने में मदद मिलेगी। रिपोर्ट के अनुसार, शहर का 3D नक्शा तैयार करने की भी योजना है।
55 वार्डों में होगा सर्वे
लोनी नगर पालिका क्षेत्र के सभी 55 वार्ड इस डिजिटल सर्वे के दायरे में होंगे।
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी के अनुसार, सर्वे के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। लक्ष्य है कि एजेंसी का चयन होने के बाद अक्टूबर या नवंबर 2026 तक सर्वे का काम शुरू कराया जाए और इसे करीब एक साल में पूरा किया जाए।
सितंबर 2026 में लोनी नगर पालिका की सीमा के भीतर घरों, भवनों और व्यावसायिक प्लॉट आदि की GIS/GPS आधारित मैपिंग के लिए एजेंसी चयन संबंधी टेंडर भी जारी किया गया है।
हर संपत्ति को मिलेगा UID नंबर
डिजिटल सर्वे पूरा होने के बाद संपत्तियों को यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर यानी UID देने की योजना है।
UID से किसी संपत्ति की डिजिटल पहचान करना आसान हो सकता है। इससे नगर पालिका के रिकॉर्ड में संपत्ति की जानकारी को व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने और भविष्य में उसे ट्रैक करने में मदद मिल सकती है।
इमरजेंसी में भी मिलेगी मदद
डिजिटल मैपिंग का इस्तेमाल केवल प्रॉपर्टी रिकॉर्ड के लिए नहीं किया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, संकरी गलियों वाले इलाकों में आग लगने या मेडिकल इमरजेंसी जैसी परिस्थितियों में दमकल और एंबुलेंस को सही स्थान तक पहुंचने में परेशानी होती है।
GPS आधारित लोकेशन रिकॉर्ड होने के बाद आपातकालीन वाहनों को संबंधित संपत्ति तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर भी नजर
डिजिटल सर्वे के दौरान जमीन का सीमांकन और अलग-अलग प्रकार की भूमि की पहचान भी की जाएगी।
इसके तहत झील, तालाब, हरित पट्टी, औद्योगिक क्षेत्र, बंजर जमीन और चकरोड जैसी जमीनों का अलग-अलग डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की योजना है।
इससे अवैध निर्माण और अतिक्रमण की पहचान करने में नगर पालिका को मदद मिल सकती है। डिजिटल डेटा को गाजियाबाद विकास प्राधिकरण यानी GDA के साथ साझा करने की भी बात रिपोर्ट में कही गई है।
प्रॉपर्टी टैक्स का दायरा बढ़ाने की तैयारी
लोनी नगर पालिका क्षेत्र में डिजिटल सर्वे का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य संपत्तियों को प्रॉपर्टी टैक्स के दायरे में लाना भी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल नगर पालिका करीब 1.43 लाख भवनों से लगभग 18 करोड़ रुपये सालाना प्रॉपर्टी टैक्स वसूलती है, जबकि क्षेत्र में कुल संपत्तियों की संख्या करीब 3 लाख से अधिक बताई गई है।
सर्वे के बाद अधिक संपत्तियों को नगर पालिका के रिकॉर्ड में शामिल करने और टैक्स व्यवस्था को बेहतर तरीके से लागू करने में मदद मिल सकती है।
बढ़ेगा नगर पालिका का डिजिटल रिकॉर्ड
डिजिटल सर्वे पूरा होने के बाद लोनी के पास संपत्तियों और जमीन से जुड़ा एक विस्तृत डिजिटल डेटाबेस उपलब्ध होगा।
इससे नगर पालिका को यह समझने में मदद मिल सकती है कि किन इलाकों में:
सड़क की जरूरत है
सीवर की सुविधा उपलब्ध नहीं है
पानी की समस्या है
जलभराव की समस्या है
अन्य नागरिक सुविधाओं की जरूरत है
इसके आधार पर भविष्य में विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करना आसान हो सकता है।
लोनी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह डिजिटल सर्वे?
लोनी जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्र में संपत्तियों का सटीक डिजिटल रिकॉर्ड नगर प्रशासन के लिए उपयोगी हो सकता है।
एक डिजिटल मैप और UID आधारित प्रॉपर्टी रिकॉर्ड से नगर पालिका के लिए संपत्तियों की पहचान, टैक्स व्यवस्था, भूमि उपयोग की निगरानी और नागरिक सुविधाओं की योजना बनाने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकती है।
हालांकि, सर्वे शुरू होने और पूरा होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इसका प्रशासनिक और नागरिक सेवाओं पर वास्तविक प्रभाव कितना पड़ता है।
लोनी डिजिटल सर्वे 2026: मुख्य बातें
जानकारी | विवरण |
क्षेत्र | लोनी नगर पालिका, गाजियाबाद |
अनुमानित संपत्तियां | करीब 3 लाख |
वार्ड | 55 |
सर्वे तकनीक | Drone, GIS और GPS |
प्रस्तावित रिकॉर्ड | Digital Property Mapping |
संपत्ति पहचान | UID नंबर |
संभावित शुरुआत | अक्टूबर–नवंबर 2026 |
अनुमानित अवधि | करीब 1 वर्ष |
उपरोक्त समयसीमा रिपोर्ट में दी गई योजना के आधार पर है और प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार इसमें बदलाव हो सकता है।
निष्कर्ष
लोनी नगर पालिका क्षेत्र में करीब 3 लाख संपत्तियों का प्रस्तावित डिजिटल सर्वे शहर के प्रॉपर्टी रिकॉर्ड और नगर प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण बदलाव हो सकता है। ड्रोन, GIS और GPS तकनीक के जरिए तैयार होने वाला डिजिटल डेटा संपत्तियों की पहचान और मैपिंग को व्यवस्थित करने में मदद करेगा।
सर्वे के बाद UID आधारित प्रॉपर्टी रिकॉर्ड, बेहतर टैक्स मैपिंग और नागरिक सुविधाओं की जरूरत वाले क्षेत्रों की पहचान जैसे काम अधिक व्यवस्थित तरीके से किए जा सकते हैं। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि सर्वे का काम निर्धारित समय के अनुसार कब शुरू होता है और पूरा होने के बाद इसका इस्तेमाल किस तरह किया जाता है।



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